शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

मथुरा-मदीना हो जाये.....


हे उप्पर वाले मेरी आँख वो नगीना हो जाये ।
की जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाए

रहमत करना मालिक रहे भरा पूरा मेरा परिवार।
कोमी एकता बड़े सबमे हर धर्मं करे आपस मे प्यार।
अजमेर-अयोध्या की गलियों मे मेरा जीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।


ईद दीवली सब मिलकर मनाये, मनाये क्रिसमस दस्हेरा
भारतीयता ही हमारा धर्मं है दो यह झंडा लहरा
हिन्दुस्ताब के उप्पर मालिक तेरी रहमत का खजीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।


राम रहीम सब एक है, एक है कशी काबा ।
सबका मालिक एक है कह गए साईं बाबा।
खुशबु उड़े भाई चारे की देश मे पार हिंदुस्तान का सफीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।

- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

1 टिप्पणी:

  1. अमन भाई ,
    कौमी एकता का सन्देश मुखरित करती हुई आपकी रचना दिल को छू गई !
    बहुत अच्छा लिखते हो आप !
    बधाई !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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