मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

आरती श्री गूगल महाराज.


ॐ जय गूगल हरे !!
स्वामी जय गूगल हरे !!
प्रोग्रामर्स के संकट, नेट यूजर्स के संकट !!
एक क्लिक मे दूर करे !!
ॐ जय गूगल हरे !!

जी-मेल की सुविधा !!
सब जमकर मेल करे, स्वामी मिल कर मेल करे !!
सोशल नेटवर्किंग ऑरकुट, लेखको के लिए ब्लॉगर !!
सब जन चैट करे !!
ॐ जय गूगल हरे !!

तुम देवा सर्च इंजिन !!
तुम इन्टरनेट राजा, स्वामी इन्टरनेट राजा !!
तुम होमेवोर्क कराओ, प्रोजेक्ट पूरे कराओ !!
कस्ट हरो वर्क का !!
ॐ जय गूगल हरे !!

तुम नोलेज के सागर !!
तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता !!
मैं तो सर्चर खल्कामी, तुम हो सर्वर स्वामी !!
सब मेटर सर्च करता !!
ॐ जय गूगल हरे !!

वेब सर्च, इमेज सर्च !!
न्यूज़ भी सर्च करे, स्वामी ब्लॉग भी सर्च करे !!
अपने सर्च दिखाओ, सारी री-सर्च दिखाओ !!
साईट पे खड़ा खड़ा में तेरे !!
ॐ जय गूगल हरे !!

गूगल क्रोम ब्राऊजर !!
नेट स्पीड को तेज करे, स्वमी नेट स्पीड दोढाये !!
गूगल अर्थ घर बैठे, गूगल मैप घर बैठे !!
सारी दुनिया घुमवाए !!
ॐ जय गूगल हरे !!

गूगल देव जी की आरती !!
जो कोई भी गावे, जो नेट यूजर गावे !!
कहत "मारवाड़ी" कविवर , कहत "अमन" नेट यूजर !!
सरे वाइरस सिस्टम से पल में दूर भगे !!
ॐ जय गूगल हरे !!

- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

my video of dance..................

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

एक नारी की आत्मकथा


मै हूँ एक नारी........

नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।
बड़ा कमजोर सा लगता है न मेरा नाम ।
दुर्भाग्य! नर मे दो बड़ी मात्रा जोड़ने से बनता है।
फिर भी नर से कमजोर हूँ मै, क्यूकि मै हूँ ,
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

कितने नर तो मुझे जन्म ही नहीं लेने देते है।
नारी हूँ न पैदा होते ही मार देते है।
अरे! मुझे ढंग से आँखे भी नहीं खोलने देते है।
खत्म कर देते है मेरे पैदा होते ही मेरी जीवन कहानी।
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

ओह! वह कैसा द्रश्य है? मेरी नजरो से देखो।
नारी के मंदिर मै नर की दुआये मांगी जा रही है।
अरे ओ मांगने वालो मत भूलो की देने वाली दुर्गा भी है एक नारी।
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

अरे! वहा देखिये एक लड़के ने जन्म लिया है।
वाह! क्या बात है लड्डू बांटें जा रहे है।
मगर यह क्या हा हा यही देखिये यह हरियाणा है।
यहाँ कन्या के भ्रुर्ण निर्दयता से काटे जा रहे है।
क्या बेच खाई इन जालिमो ने मानवता सारी।
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

अरे! वहा देखिये भाई बहन खेल रहे है,
माँ की आवाज मोहन स्कूल जा, मोहिनी चाय ला,
क्या लड़को को ही चाहिये शिक्षा लाडो को नहीं सिखानी?
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

ओह! इधर तो देखे लड़की की शादी है।
मगर यह बाबुल राजा क्या बेच रहे है?
ओह! दहेज़ मे पांच लाख मांगे है।
वह तो अपना पुश्तैनी घर बेच रहे है।
दुल्हन ही दहेज़ है कब समझेंगे बात यह प्यारी?
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।
ओह वहा वो लड़की मिटटी के तेल के साथ क्या कर रही है?
नहीं, नहीं ऐसा मत करो बहिन ऐसा मत करो नहीं नहीं
अफ़सोस फिर दहेज़ की आग मे जल गयी किसी बाबुल की प्यारी.
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

अरे मगर मे यह सब आपको क्यों बता रही हूँ ?
खाली आपको बता अपना गला सुखा रही हूँ !
आपने भी तो मुझे कोख मे मारा होगा.
मेरे बाबुल से दहेज़ तो माँगा ही होगा
'प्रताड़ित' शब्द मे सिमट गयी मेरी कहानी.
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

पापा ओ पापा मुझे मत मरो मुस्काने दो
इस रंगीन दुनिया मे पंख फ़ैलाने दो
मुझे एक मौका तो दो रोशन आपका नाम करुँगी
मुझे एक मौका दो रोशन आपका नाम करुँगी.
प्रतिभा पाटिल कल्पना चावला बनूँगी
कुछ ऐसा कर दिखाउंगी की जाओगे मुझ पे वारी
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी।

मेरे बिना दुनिया कैसी होगी, सोचो.
क्या नहीं सोच पा रहे हाँ मे जानती थी यह
मेरे बिना दुनिया अपना अस्तित्व झुठलाती है.
जन्म देती है नारी जननी कहलाती है
मेरे बिना कैसे चलेगी यह दुनिया दारी?
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी

खेर आज आपने मेरी कथा सुनी कल भूल जाओगे।
फिर किसी नारी को जिन्दा जलते देखते जाओगे।
अरे अब भी वक़्त है चला दो इस बुराई पर आरी।
नारी हाँ मै ही हूँ, मै हूँ एक नारी

यह थी नारी की गाथा इसे जन जन तक पहुचना
नारी की रक्षा की सदा ही अलख जगाना
मारवाड़ी ने नारी के शब्दों से अपनी कलम संवारी
नारी हा वो थी, वो थी एक नारी

-
अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"






























मंगलवार, 18 जनवरी 2011

वो बचपन सुहाना

वो बचपन मै वापस कहा से लाऊ ?
कोई तो बता दे कि किस दर पर जाऊ?
मै विनती करू मै इबादत करू लगाऊ मै ध्यान
मुझे मेरा बचपन लोटा दो भागवान

नहीं मुझको चहिये हीरा और मोती नहीं चहिये मुझको सोना
मुझे तो बस मेरे बचपन की यादों मे वापस जाकर है खोना

वो देर से उठना तेज साईकिल चलाना प्रार्थना मे करना रास्ट्र गान
मुझे मेरा बचपन लोटा दो भागवान

लोटा दो भगवन मुझे मेरे खिलोने का वो डब्बा
वो तोतली जुबान भी दो वापस जिससे खाने को कहता मे हप्पा
वो पापा के पीछे से टॉफिया खाना चट कर जाना अपनी दुकान
मुझे मेरा बचपन लोटा दो भगवान


वो आम की बगिया भी वापस लोटा दो जिसमे बैठ हम आम थे खाते
माली काका जब मारने आते उनको तो भाग उनको जीभ चिढाते
वो कहना माली अंकल का की अमन तू हो गया बड़ा ही शैतान
मुझे मेरा बचपन लोटा दे भगवान

'मारवाड़ी' पर भगवान कृपा बरसना
उसे उसका बचपन वापस लौटना
वापस जीना चाहू मे बन कर के नादान
मुझे मेरा बचपन लोटा दे भगवान


इस ही कड़ी मे मेरी एक और कविता उपरोक्त कविता से मिलती हुई
शीर्षक- वो स्कूल की यादें

स्कूल की बातें बहुत याद आती।
वो बचपन की यादें आंसू तक ले आती ।
वो देर से उठ मुह धो स्कूल को जाना ।
बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना।

वो कक्षा की पढाई इंटरवेल की मस्ती।
हा याद है मुझको आठवे घंटे की सुस्ती।
वो खाली वादन मे अपनी कविता
सुनाना।
बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना।

वो ग्यारहवी कक्षा मे जिन्दगी गयी बदल ।
पढाई इतनी बढ़ गयी की माथे पे पढ़ा बल।
वो ट्यूशन से स्कूल , स्कूल से ट्यूशन को जाना।
बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना।


वो पंद्रह अगस्त छब्बीस जनवरी की बातें
डांस प्रक्टीस मे कटते थे दिन और रातें
वो भारत माता की जय के नारे लगाना
बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना

हे भगवन क्यों मुझको तुमने बड़ा किया?
'मारवाड़ी' से क्यों उसका बचपन ले लिया?
अमन को तुम उसका बचपन लौटना
बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

मथुरा-मदीना हो जाये.....


हे उप्पर वाले मेरी आँख वो नगीना हो जाये ।
की जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाए

रहमत करना मालिक रहे भरा पूरा मेरा परिवार।
कोमी एकता बड़े सबमे हर धर्मं करे आपस मे प्यार।
अजमेर-अयोध्या की गलियों मे मेरा जीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।


ईद दीवली सब मिलकर मनाये, मनाये क्रिसमस दस्हेरा
भारतीयता ही हमारा धर्मं है दो यह झंडा लहरा
हिन्दुस्ताब के उप्पर मालिक तेरी रहमत का खजीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।


राम रहीम सब एक है, एक है कशी काबा ।
सबका मालिक एक है कह गए साईं बाबा।
खुशबु उड़े भाई चारे की देश मे पार हिंदुस्तान का सफीना हो जाये।
जहा भी मेरी नजर पड़े वो जगह मथुरा मदीना हो जाये।

- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

प्यारी भारत माता को...


छोटे छोटे बच्चे हम इस देश की शान है।
प्यारी भारत माता को हम बच्चो का प्रणाम है।

खेत मे यहाँ उगे सच्चाई गीत ख़ुशी के गाते है।
भारत माता की रक्षा को रण मे लड़ने जाते है।
यही हमारी कर्म भूमि यही हमारा जहाँ है ।
प्यारी भारत माता को हम बच्चो का प्रणाम है।

सर पर मुकुट रुपी हिमालय गले मे गंगा का हार है।
सबसे बढ़ कर इस भमि पर हम बच्चो का प्यार है।
कुरान की आयतें हर मुख पर लव पर राम राम है।
प्यारी भारत माता को हम बच्चो का प्रणाम है।

छोटे छोटे बच्चे हम इस देश की शान है।
प्यारी भारत माता को हम बच्चो का प्रणाम है।

- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

हिन्दू मुस्लिम भाई भाई


मंदिर मै आते अक्षर चार मज्जिद मै आते अक्षर चार ।
क्यों दंगा करते हो हिन्दू मुस्लिम करो आपस मै प्यार।

ह से हिन्दू आता है म से मुस्लिम आता है ।
ह और म मिला दो तो हम आ जाता है।

मंदिर मे मै करता हु इबादत मज्जिद मे मै करता हूँ पूजा।
मुझ जैसा सर्वधर्म मानने वाला अजि ढूंड लीजिये अब कोई दूजा ।

मत कहो की कोई हिन्दू है या कोई है मुसलमान ।
गर्व करो की दोनों की रगों मै बस्ता है हिन्दुस्तान।

तो आज से बंद करो दंगा और फसाद और देकर ,
मुझको दाद एक बात सुनो जो नेक है ।

इश्वर अल्लाह अलग अलग नहीं है वो तो एक है।
बस एक है जी एक है हा एक ही है।
- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"

आजादी


एक दिन मै जा रहा था सड़क पर ।
मुझको मिली एक दादी ।

मैंने कहा नाम क्या है तेरा ओ दादी।

वो बोली की मेरा नाम आजादी।



मैंने कहा की दादी अब तो तुम बुड्ढी हो गयी हो।

६३ साल की पूरी हो गयी हो।

आपसे है एक विनती जरुर ।

मत जाना हमसे दूर ।



दादी बोली मै तो आई थी ख़ुशी से।

मुझे क्या पता था मेरा स्वागत होगा दुखी से।

आतंकवाद गुलाम बना रहा है ।

अहमदाबाद मुंबई मै विस्फोट करा रहा है।



लालू जी खा रहे है चारा ।

आम जनता तो है बेचारा ।

संसद मै दिखाए जा रहे है नोट।

यह सब हो रहा है पाने के लिए विश्वास वोट ।



अगर ऐसा ही चलता रहा तो मै नजर ना आउंगी।

एक दिन तुम सब को छोड़ कर चले जाउंगी।

फिर मत रोना मत चिल्लाना की।

कहा गयी दादी कहा गयी आजादी।


- अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"